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Tuesday, 14 February 2012

शिकायतें

आ जाएँ अगर सामने वो
मैं नज़रें चुरा लूँगा,
मेरे दिल की तल्खिया कहीं
निगाहों में न उतर आयें.
शिकायतें चाहे कितनी भी हों उनसे लेकिन
सर्द आहों से मेरी, उन्हें चोट न लग जाए!

5 comments:

  1. very interesting blog....

    painting collection is excellent!!!

    regards.

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  2. Bahut hi sunder kavita....just short and sweet

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    Replies
    1. Bahut- bahut shukriya Seema ji!

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    2. Bahut- bahut shukriya Seema ji!

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