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समर्पण: उन अनगिनत प्राणधारियों को जिन्हे इन्सान की क्रूरता अनेकों कारणों से मारे डाल रही है.
"नाचेंगे, गायेंगे, रंग-जमायेंगे...
जन्नत उतारेंगे"
हाँ, प्रभु श्री (श्री)
पर आप ये भूल गए
कि हज़ारों चिड़ियाँ, मछलियाँ, कछुए,
लाखों कीट-पतंगे, केंचुए, मेंढक, टिड्डे
बिला वजह बेमौत मारे गए
बचे हुए बेघर-बर्बाद हो गए..
दुनियादार व्यापारियों की
ख़ुदग़र्ज़ी से तो शिक़ायत
न होती हमें
पर प्रेम-आध्यात्म के अवतार
आप को हम करोड़ों
जीवात्माएँ कैसे माफ़ कर दें?




