Followers

Friday, 15 September 2017

क़ीमती

ड्रॉअर में बस यूँ ही पड़ी
सस्ती शराब की बोतल हूँ
'बार' में सजा क़ीमती स्कॉच
का ख़ाली डिब्बा नहीं!

चाहें तो पियें
और मस्त हो जाएँ
या फिर डिब्बों को निहारें
मन बहलायें.

हाँ, अगर पियें
तो ज़रा संभल कर
ज़ोर का धक्का लगेगा,

डिब्बों से कोई डर नहीं
सजावटी सामान है
बरसों यूँ ही रहेगा.


25 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/09/35.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. रचना पसंद करने और 'मित्र-मंडली' पर लिंक करने के लिए अनेक धन्यवाद, राकेश जी! आभार:)

      Delete
  2. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/09/35.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  3. आदरणीय अमित जी -- पहली बार आपके ब्लॉग पर आकर आप को पढ़ना बहुत अच्छा लग रहा है | अलग सी भावनाओं को व्यक्त करती आप की रचना बहुत अच्छी लगी | सादर शुभकामना ------

    ReplyDelete
    Replies
    1. स्वागत है आपका रेनू जी! आपकी टिपण्णी में 'अलग सी भावनाओं को व्यक्त करती' पढ़ कर आनन्दित हूँ..अगर अलग सी भावनाओं को पढ़ने में रुचि रखती हैं तो मेरे ब्लॉग पर इसी वर्ष जनवरी से अप्रैल की रचनाएँ पढ़ने का समय निकाल पायें तो मुझे बेहद ख़ुशी होगी. आप जैसे सुधी पाठक ही मुझे कुछ नया प्रकाशित कर पाने का (लिखता तो मैं बहुत कुछ हूँ ) साहस देते हैं. प्रोत्साहन के लिए अनेक धन्यवाद... आती रहिएगा..सादर..

      Delete
  4. बहुत गूढ़ता से भरी सुन्दर रचना जो अपने घरेलु और बाज़ारू रिश्ते अथवा वस्तु की भिन्नता का यथार्थ बयां करती है।
    आपने लम्बा समय लिया है नई हिंदी रचना पाठकों के समक्ष लाने में।
    बधाई एवं शुभकामनाऐं।

    ReplyDelete
    Replies
    1. Ye rachna pasand karne, aur mujhe parhne ki ichchha rakhne ke liye anek dhanywaad, Yadav ji:) Abhibhoot hoon..

      Delete
    2. *mere blog par aapki upastithi se abhibhoot hoon!

      Delete
  5. डिब्बों से कोई डर नहीं
    सजावटी सामान है
    बरसों यूँ ही रहेगा.
    ​बहुत गहरे शब्द लिखे हैं आपने अमित जी !!

    ReplyDelete
    Replies
    1. Pasand karne ke liye shukriya Yogendra bhai:)

      Delete
  6. Like yogiji says "Its very deep' that much one could understand but not fully-Could you enlighten on the connect between the first two lines ans the last lines..?

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thank you for your interest Rajeev, I'll explain to YOU since it's in Hindi..See it's like this: The bottle is lying somewhere unnoticed but it is filled with (even if cheap) liquor, it will be emptied one day and thrown away, the same will however delight some in the process. On the other hand the boxes sitting on the shelves of a bar, held expensive contents in the past but are empty at the moment and serve as decoration only..Those will remain there like this for years at end without 'giving' away anything..

      Delete
    2. Thank you so much for the clarification Amit!

      Delete
  7. Replies
    1. Thank you Jyotirmoy:) Glad you liked:)

      Delete
  8. That's why, all 'khali dabbas' are happy nowadays. But, then empty vessels always seemed merrier making much noise.:) Nice!

    ReplyDelete
  9. Glad you liked ma'am☺ Thank you💐

    ReplyDelete
  10. Replies
    1. Glad you liked Rajeev, thank you ☺

      Delete
  11. Never underestimate the worth of alcohol- irrespective of whether pricey or less expensive coz it has its own charm & is capable of causing harm :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. Waah kyaa baat hai doctor sahiba😊☺👍👌

      Delete
  12. बहुत सच लिखा है ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. Glad you liked, Digamber sir, thank you:)

      Delete