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Friday, 23 January 2015

Capturing Time..?






इंतज़ार

कट रही है ज़िन्दगी
इंतज़ार में
हमारी तुम्हारे
तुम्हारी हमारे !

उदास धुन

 ख़ामोश  सर्द  शाम
गूँजती रही उदास धुन जैसी
देर रात तक
याद तुम्हारी आती ही रही
अलस्सुबह तलक
और फिर एक और
बेमानी दिन शुरू हो गया.

दरिया-आकाश

तुम ढूँढती हो मुझमें सारा आकाश
और पाती हो बस कुछ साँस,
मैं चाहता हूँ तुमसे बस इक क़तरा
और पा लेता हूँ पूरा दरिया.

लकीरें

क़िस्मत  ' दौलत की तो थीं ही नहीं,

मेरे हाथों की हदों ने थाम लीं वर्ना

जाने कहाँ तक जातीं ये ग़म की लकीरें।

Wednesday, 19 November 2014

उदासी

मुस्कुराहट  से कहाँ  छुपती है  आँखों की उदासी

आँसुओं के समुन्दर आस्तीनों से नहीं पुंछा करते।



Saturday, 11 October 2014

ज़िंदगी



जड़ें रह गयीं प्यासी, मिट्टी तक ना पहुँची
हाँ आई तो थी बारिश बस पत्ते भिगो गयी.

तूफ़ानों में गुज़री  यूँ तो  सारी ज़िंदगी
मौत मेरी मगर  दम घुटने से हो गयी.

बड़ा ही रूखा  और बेरंग है  ये फ़लसफ़ा
इससे तो शायरी तल्ख़ और बदरंग भली थी।

जला किया ताउम्र  जंगल की  बानगी
बाद मरने के ना इक चिंगारी नसीब थी।

Translation:
Life

Did not reach the soil      leaving my roots thirsty
yes,  it rained once,  but barely sprayed the foliage.

My whole life though was tempests and hurricanes
but it ended due to smothering and want of some air.

This obscure philosophy  (life)  is      quite tedious  and  stark
poetry (imagination) even bitter and pale was throbbing at least.

My soul kept burning   throughout   like a fire in forest
yet the body was deprived of a mere flicker* when dead.

(*last rites)