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Thursday, 11 February 2016

दीवार-2


कभी उचक कर
या  लपक  कर
देख भर लेता तुम्हें
बाल सुखाते
या बस आते - जाते;
पर ये काँच..!

नहीं कर पाऊँगा
कोई बेजा हरकत
नहीं छिलें - कटेंगे
हाथ - पाँव
दिल मेरा लेकिन
है लहूलुहान .

Image courtesy: Google

ये भी पढ़ें : दीवार-1  




Monday, 8 February 2016

दीवार-1


कि कहीं अनधिकार चेष्टा
या अतिक्रमण की मंशा
मान बैठो
मैं कुछ बोला;
और तुमने हम दोनों के बीच
दीवार उगा दी,
पर उसके छोर पे
वो पैने-नुकीले काँच
रोपने ज़रूरी थे क्या?
Image courtesy: Google

ये भी पढ़ें : दीवार-2 



Monday, 1 February 2016

गन्दा नाला



गन्दा नाला हूँ मैँ
विषैला, वीभत्स
दुर्गन्धित और कुरूप.

तुम निर्मल-गहन समुन्दर
हरे-नीले-सुनहरे-अलौकिक.

उलीचता हूँ तुममें
अपना कलुष और पाप
निरन्तर ओछेपन से.

और समा लेते हो तुम सब कुछ
हँस कर अपनी गहराई में.

सिर्फ़ माफ़ करते रहते
छिछोरी हरक़तों को मेरी
बल्कि साफ़ भी करते हो मुझे
ज्वार - भाटा खेल कर.


This post is dedicated to Sunaina Sharma for her true interpretation and evaluation of this poem..




Wednesday, 13 January 2016

Fodder


Jaded are my eyes and gorged brain
Oh so badly I need something to sustain
No placebo I crave for, give me a balm..
Who feeds on cartfuls of fodder?
I thrive on a pearl on an ivory palm!

                   Linked to: Poets United

Wednesday, 6 January 2016

Between the Sheets


We both vulnerable
To each other
Not a stitch in defense
And who needs it?

I explore.. you elude
you oblige.. I cajole
I seek you grant
And then play pricey

Intertwined in each other
The whole night
My poem and me
Between the sheets of paper!

Linked to: Poets United





Tuesday, 5 January 2016

सिपाही


सिपाही मेरे
मर रहे बेमौत
नेता ख़ामोश 

Friday, 1 January 2016

हंगामा


हंगामा  है  क्यों  बरपा
जो तारीख़ बदल गयी है
नाउम्मीदी  कल भी थी
दिल दुखता आज भी  है

This post is dedicated to millions of fellow humans who look perplexed at limos whizzing or rolling languorously to decked up swanky venues overflowing with spirits, goodies, music, flowers and perfumes on the 31st of December every year..

Opening line courtesy: Akbar Allahabadi 
Popularized by: Ghulam Ali 

Wednesday, 30 December 2015

रीता


रीता ही रहा
बारिश झमाझम
उल्टा मटका

Tuesday, 29 December 2015

आग़ोश


लेता सबको
आग़ोश में अपने
जवान पेड़