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Sunday, 29 March 2015

महुआ


मस्ती में झूमे
मह-मह-महके
मौजी महुआ


पाकड़


कितना पक्का
बैठा जड़ें जमाये
ज़िद्दी पाकड़


आम्बी


दोशीज़ा आम्बी
कभी है सरगोशी
कभी ख़ामोशी


शहतूत


बाँटे सबको
संजीदा शहतूत
मिठास ख़ूब


बाँस


सरसराएँ
बाँसों के झुरमुट 
फरफराएँ


Saturday, 28 March 2015

देवदार


उचक रहा
देवदार फुनगी
आवारा चाँद


पीपल


झूमे पीपल
आठों पहर गाये
जीवन गीत


शीशम


ठण्डी कुइआँ
धूप-प्यास बलैयाँ
शीशम छैयाँ


चम्पा


रुसवा रात
चम्पा मनभावन
सुबह पाक